परिचय
“धान ही जीवन है” (Rice is Life) — धान वोखा के लोगों का मुख्य खाद्यान्न है। पारंपरिक कृषि वोखा जिले के किसानों का प्रमुख व्यवसाय रही है।
इसलिए, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र की प्रगति पर निर्भर करती है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कृषि विभाग प्राकृतिक संसाधनों, भूमि, जल तथा आनुवंशिक संपदा का उपयोग करके जिले में तकनीकी रूप से सक्षम, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, पर्यावरण के अनुकूल तथा सामाजिक रूप से स्वीकार्य सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
भौगोलिक भू-भाग की बनावट के कारण झूम अथवा स्थानांतरित खेती किसानों की प्रमुख कृषि पद्धति है। जिले में प्रचलित कृषि प्रणालियों में पारंपरिक झूम खेती, सीढ़ीदार धान की खेती (TRC) तथा मैदानी और तलहटी क्षेत्रों में गीली धान की खेती (WRC) शामिल हैं। स्थानांतरित खेती में मिश्रित फसल प्रणाली अपनाई जाती है, जिसमें स्थानीय किस्मों के अनाज, दलहन, तिलहन, कंद फसलें, मसाले तथा अन्य मसाला फसलें उगाई जाती हैं। ये फसलें मुख्यतः जैविक प्रकृति की होती हैं।
जलवायु परिवर्तन का कृषि उत्पादन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, जिससे फसल जैव विविधता को नुकसान पहुँचने की आशंका रहती है, यदि उसका सतत प्रबंधन नहीं किया जाए। इसलिए, कृषि समुदाय में जागरूकता पैदा करके तथा फसल चक्र, दोहरी फसल प्रणाली, रिले क्रॉपिंग (क्रमिक अंतरवर्ती बुवाई) और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग जैसी उन्नत कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करके संरक्षण के लिए सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इससे मिट्टी के पोषक तत्वों को बनाए रखने तथा भोजन की बढ़ती माँग को मात्रा और गुणवत्ता, दोनों दृष्टियों से पूरा करने के लिए उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
विभाग द्वारा कार्यान्वित विभिन्न योजनाएँ
1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अक्टूबर 2007 में शुरू किया गया था। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
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क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता बढ़ाकर धान, गेहूँ तथा दलहन के उत्पादन में वृद्धि करना।
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सतत तरीके से कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करना।
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व्यक्तिगत कृषि स्तर पर मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता को पुनर्स्थापित करना।
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कृषि स्तर पर किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना।
2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना तथा 4% कृषि विकास दर प्राप्त करने की दिशा में कार्य करना है।
इस योजना को क्लस्टर परियोजना के अंतर्गत लागू किया जा रहा है। कृषि एवं संबद्ध विभागों द्वारा कुल 4 क्लस्टर परियोजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं, जिनके अंतर्गत 20 गाँव शामिल हैं।
3. RKVY के अंतर्गत नकदी फसल विकास
RKVY के अंतर्गत आलू की खेती को नकदी फसल के रूप में अपनाया गया। इस कार्यक्रम के तहत 4 गाँवों में कुल 5 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की गई, जिससे 25 किसानों को लाभ मिला।
4. RKVY के अंतर्गत कृषि में महिलाएँ
इस कार्यक्रम के अंतर्गत 3 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) की पहचान की गई और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया गया। तीन गाँवों के कुल 45 स्वयं सहायता समूह सदस्यों ने प्रशिक्षण में भाग लिया।
स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों में अदरक, अरबी तथा मिर्च की खेती शामिल थी, जो लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में की गई।
5. एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) — RKVY
जिले में एकीकृत कीट प्रबंधन कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच रासायनिक कीटनाशकों के अवशेषों के हानिकारक प्रभावों तथा खेतों में कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
प्रशिक्षण के दौरान वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है तथा किसानों के लिए लाभकारी कीटों के महत्व पर विशेष जोर दिया जाता है।
6. वर्ष 2017–18 के दौरान RKVY के अंतर्गत IPM का कार्यान्वयन
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आवंटित किसान क्षेत्रीय विद्यालय (FFS) की संख्या: 2
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पूरे मौसम में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम: 3
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प्रशिक्षित लाभार्थियों की संख्या: 110
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शामिल गाँवों की संख्या: 2
7. RKVY के अंतर्गत कृषि उपकरणों का वितरण
RKVY के अंतर्गत जरूरतमंद किसानों को निम्नलिखित उपकरण एवं सामग्री प्रदान की गई:
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स्प्रेयर
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फावड़ा (Shovel)
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पानी देने का कैन
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कुदाल (Spade)
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रेक
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जम्पर
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पिक ऐक्स
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मक्का छीलने का उपकरण (Maize Sheller)
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हँसिया
8. RKVY के अंतर्गत पावर टिलर पथ
इस कार्यक्रम के तहत 3 पावर टिलर पथों का निर्माण किया गया। इनकी कुल लंबाई 11 किलोमीटर थी, जिससे 4 गाँवों को लाभ मिला।
9. RKVY के अंतर्गत विपणन संवर्धन (भंडारण)
किसानों को प्रोत्साहित करने तथा कृषि उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए 4 अलग-अलग स्थानों पर विपणन शेड के निर्माण का कार्य शुरू किया गया।
10. राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA)
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA), जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के अंतर्गत एक मिशन है। इसे राज्य में वर्ष 2014–15 के दौरान शुरू किया गया था।
इसके प्रमुख उद्देश्य सतत कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों को उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करना, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति कृषि को सक्षम बनाना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा जल का अधिकतम और कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।
NMSA के अंतर्गत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD) एक प्रमुख घटक है। इसके उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
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प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा वर्षा आधारित कृषि का विकास करना।
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विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता बढ़ाना।
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एकीकृत कृषि प्रणाली, जल उपयोग दक्षता तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना।
11. कृषि यंत्रीकरण
इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को कृषि मशीनरी पर 50% सब्सिडी प्रदान की जा सकती है। कस्टम हायरिंग के लिए कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करके किसानों को मशीनरी उपलब्ध कराई जाती है।
12. पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन (MOVCD)
इस मिशन का उद्देश्य फसल एवं कृषि उत्पादों के लिए विशिष्ट मूल्य श्रृंखला विकसित करना, जैविक फसल उत्पादन में मौजूद कमियों को दूर करना तथा उत्पादक संगठनों और कंपनियों को प्रोत्साहित करना है।
इसका एक अन्य उद्देश्य पारंपरिक कृषि प्रणालियों को जैविक खेती से बदलना तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के उत्पादों को ब्रांड और लेबल के माध्यम से पहचान दिलाना है।
वर्ष 2017–18 के दौरान इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों द्वारा अदरक और मिर्च की खेती की गई।
13. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य जल के कुशल परिवहन एवं उपयोग को बढ़ावा देना है।
इस योजना का मुख्य सिद्धांत है — “प्रति बूँद, अधिक फसल” (Per Drop More Crop)।
14. वोखा जिले में पाई जाने वाली मिट्टी के प्रकार
जिले की मिट्टी को निम्नलिखित समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. शीत एवं समशीतोष्ण जलवायु क्षेत्र की शंकुधारी वनस्पतियों वाली मिट्टी (पहाड़ी ढलान एवं सीढ़ीनुमा क्षेत्र):
यहाँ गैर-चूना युक्त शेल चट्टानों से निर्मित गहरे धूसर-भूरे तथा गहरे भूरे रंग की पॉडजोलिक मिट्टी पाई जाती है। यह दोमट चिकनी मिट्टी होती है, अम्लीय प्रकृति की होती है तथा जैविक पदार्थों से समृद्ध होती है, लेकिन इसमें फॉस्फोरस (P₂O₅) और पोटैशियम (K₂O) की मात्रा कम होती है।
2. चौड़ी पत्ती वाले पर्णपाती वनस्पति क्षेत्र की शीत पर्वतीय जलवायु वाली मिट्टी:
पहाड़ी ढलानों और सीढ़ीनुमा क्षेत्रों में धूसर-भूरी से पीले-भूरे रंग की मिट्टी पाई जाती है, जिसे ब्राउन अर्थ कहा जाता है। यह मिट्टी उथली से मध्यम गहराई तक होती है। इसकी बनावट चिकनी दोमट से गादयुक्त चिकनी दोमट होती है। यह अम्लीय प्रकृति की तथा जैविक पदार्थों से समृद्ध होती है। इसमें पोटाश और फॉस्फेट की उपलब्धता मध्यम से कम होती है।
3. मिश्रित वनस्पति वाले गर्म मानसूनी जलवायु क्षेत्र की मिट्टी (लहरदार भू-भाग):
इस क्षेत्र की मिट्टी लाल-भूरे से पीले-भूरे रंग की होती है। यह गहरी, मोटे से मध्यम बनावट वाली तथा अत्यधिक अम्लीय होती है। इसमें जैविक पदार्थों की मात्रा अधिक होती है, लेकिन फॉस्फोरस (P₂O₅) और पोटैशियम (K₂O) की मात्रा कम होती है।
4. पुरानी जलोढ़ मिट्टी:
यह मिट्टी पहाड़ी तलहटी क्षेत्रों में पाई जाती है। इसका रंग लाल-भूरे से पीले-भूरे रंग तक होता है। इसकी बनावट सामान्यतः मध्यम होती है। यह मध्यम अम्लीय प्रकृति की होती है तथा इसमें जैविक कार्बन की मात्रा अधिक होती है। फॉस्फोरस (P₂O₅) और पोटैशियम (K₂O) की मात्रा मध्यम से कम होती है।
5. नवीन जलोढ़ मिट्टी:
यह मिट्टी बहुत गहरी, हल्की अम्लीय तथा जैविक कार्बन से समृद्ध होती है। इसमें फॉस्फोरस (P₂O₅) और पोटैशियम (K₂O) की मात्रा मध्यम से कम होती है। यह जिले की सबसे उपजाऊ और उत्पादक मिट्टी है।
15. जिले में उगाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की फसलें
खरीफ मौसम में जिले के किसानों द्वारा निम्नलिखित फसलें उगाई जाती हैं:
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खरीफ अनाज: झूम धान, सीढ़ीदार/गीली धान की खेती (TRC/WRC) का धान, मक्का, छोटे बाजरे, कंगनी, जॉब्स टियर्स तथा गेहूँ।
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खरीफ दलहन: राइस बीन, नागा दाल, लोबिया, सेम तथा राजमा (खोलार)।
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रबी दलहन: मटर, मसूर तथा राजमा (खोलार)।
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खरीफ तिलहन: मूँगफली, सोयाबीन, पेरिला तथा तिल।
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रबी तिलहन: तोरिया, सरसों तथा अलसी।
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खरीफ वाणिज्यिक फसलें: गन्ना, कपास, जूट, चाय, रेमी, मेस्ता, टैपिओका, अरबी, रतालू, अदरक, शकरकंद, आलू, इलायची आदि।
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अन्य: विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ।
16. कृषि के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NEGP-A)
इस कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को उनकी कृषि संबंधी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। इसके लिए विभिन्न सूचना माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जैसे सरकारी कार्यालय, इंटरनेट, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), किसान कॉल सेंटर (KCC), कृषि क्लीनिक, सामान्य सेवा केंद्र (CSC) तथा मोबाइल फोन।
विभाग का दृष्टिकोण (Vision)
विभाग का दृष्टिकोण वर्ष 2025 तक खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना है।
नोट: मूल अंग्रेज़ी सामग्री में कुछ शब्दों और आँकड़ों में संभावित त्रुटियाँ थीं। अनुवाद में मूल आशय और दिए गए आँकड़ों को यथासंभव बरकरार रखा गया है। आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने से पहले विशेष रूप से योजनाओं के नाम, कृषि उपकरणों के विवरण और वर्ष 2025 के लक्ष्य की पुष्टि कर लें।