तोखू एमोंग की तिथि की घोषणा एवं उससे संबंधित परंपराएँ
तोखू एमोंग के आयोजन की निर्धारित तिथि की घोषणा गाँव के पुजारियों द्वारा की जाती है। घोषणा के दिन सूर्यास्त के बाद शाम को पुजारी मोरुंग (अविवाहित युवकों के सामुदायिक निवास-स्थल) में सो रहे युवकों को निम्नलिखित पारंपरिक शब्दों के माध्यम से संबोधित करते हैं:
“O……..Ojyu-kujyu-nung jo…..
Dukhudav kila………
Oyana Emvu-eri dilithokhe je…….”
इस पारंपरिक उद्घोषणा का भावार्थ है: “आज से दसवें दिन हम तोखू एमोंग उत्सव मनाएँगे। गाँव का कोई भी व्यक्ति ऐसा कार्य न करे, जो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार वर्जित हो।”
इस घोषणा के दिन से लेकर उत्सव की निर्धारित तिथि तक गाँव के बाहर के किसी भी व्यक्ति को गाँव में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती थी। यदि कोई बाहरी व्यक्ति घोषणा के बाद गाँव में प्रवेश कर जाता था, तो उसे उत्सव की निर्धारित तिथि समाप्त होने के बाद ही जाने दिया जाता था।
इस अवधि के दौरान यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए क्योन्ग (लोथा) गाँवों में वैकल्पिक परिधीय मार्गों की व्यवस्था की जाती थी, ताकि यात्री गाँव के भीतर प्रवेश किए बिना इन मार्गों से होकर अपनी यात्रा जारी रख सकें। यह परंपरा उत्सव से जुड़े नियमों और सामुदायिक रीति-रिवाजों के पालन को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम थी।